सुबह के करीब 4 बजे थे, मैं नाइट शिफ्ट में ऑफिस में था। इस बीच एक न्यूज वेबसाइट पर मैं गया तो मुख्य खबर से ठीक नीचे एक विज्ञापन देखा, जो इस बात का प्रचार था कि आप कैसे मुसलमान बन सकते हैं और इसके क्या फायदे हैं। उत्सुकता में मैंने इस पर (IslamReligion.com) क्लिक किया तो वहां मुझ जैसे विधर्मियों का इस्लाम में धर्मांतरण कराने के लिए 24 घंटे ऑनलाइन चैट सेवा थी। मैं चैटिंग में जुट गया, मैंने पूछा कि मैं इस्लाम अपनाना चाहता हूं, क्या करना होगा। इसके जवाब में उधर से कहा गया, मैं बहुत खुश हूं कि आपने इस्लाम अपनाने के बारे में सोचा, इससे आप नरक की आग से बाहर आ सकेंगे।

इसके बाद चैट पर ही उन्होंने मेरा नंबर पूछा और कॉल किया। उन्होंने इस्लाम में ईमान लाने के लिए मुझसे ‘ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह’ दोहराने को कहा। मैंने दोहराया, इसके बाद उस व्यक्ति ने मुझे बधाई दी और कहा कि ब्रदर अब आप मुसलमान हो गए हैं। मैंने उससे पूछा कि आप कॉल कहां से कर रहे हैं तो जवाब था, सऊदी अरब से। (इस पूरी बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग मेरे पास मौजूद है) तो दोस्तों इस तरह मैं सुबह-सुबह हिंदू से मुसलमान हो गया। यही नहीं पूरी बातचीत के बाद धर्मांतरण का गोरखधंधा चलाने वाली इस वेबसाइट की ओर से मुझे ई-मेल पर कुछ सामग्री भेजकर मुझे बताया गया कि अब आपके सार पाप धुल जाएंगे और आप जन्नत में पहुंचेंगे।

इसके अलावा एक और वेबसाइट http://www.newmuslims.com पर जाकर मुझे अध्ययन के लिए कहा गया ताकि मैं इस्लाम में ईमान ला सकूं। इस वेबसाइट पर यह बताया गया है कि आपको मुसलमान बनने से किस तरह फायदे होंगे। इसके अलावा तमाम जहरीले सिद्धांत भी बताए गए हैं, जिनका अनुसरण करते हुए पक्के मुसलमान बन सकते हैं और पापियों (दूसरे धर्म के लोग) के संसार से बाहर आ सकते हैं।

जिहादी तैयार करने का विषबीज
इसके अलवाा इस वेबसाइट में जिहाद के बारे में भी बताया गया है कि इसका अर्थ क्या होता है। इस वेबसाइट के अनुसार दो तरह के जिहाद होते हैं, एक रक्षात्मक और दूसरा आक्रामक। रक्षात्मक जिहाद वह है, जब मुस्लिम देश या कौम पर हमले के जवाब में हथियार उठाएं। आक्रामक जिहाद का अर्थ है, आप पापियों द्वारा शासित देश पर कब्जे के लिए हमले करें। दोनों को सही माना गया है। यही नहीं इस वेबसाइट पर ऐसे तमाम लोगों के उदाहरण दिए गए हैं, जो नए मुस्लिम बने हैं। इन लोगों में भारत और विदेशों में बसे तमाम हिंदुओं के भी शामिल होने का दावा किया गया है।

इससे ही तो नहीं भटक रहे भारत के युवा?
बीते कुछ सालों में महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु जैसे कई राज्यों से मुस्लिम युवाओं के इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की खबरें आई हैं। इनमें हिंदू और ईसाई धर्म से ताल्लुक रखने वाले भी कुछ युवा थे, जिन्होंने धर्मांतरण किया और फिर इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गए। (पढ़ें रिपोर्ट: http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/five-of-15-kerala-missing-had-converted-to-islam-just-a-year-ago-2904344/) ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ऐसी ऑनलाइन सामग्री से ही ये लोग आईएस जैसे आतंकी संगठनों में शामिल नहीं हो रहे?

सबसे बड़ा सवाल तो सरकार से ही है?
किसी भी समाज का हर व्यक्ति धर्म को लेकर समान चेतना नहीं रखता। जन्नत के सपने, सारे पाप धुलने के वादे और तमाम हसीन वादों के चलते सामान्य समझ वाले युवाओं के भटकने की खासी संभावना रहती है।देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह कई बार दोहरा चुके हैं कि इस देश के मुसलमान आईएस से कतई प्रभावित नहीं हैं। लेकिन, धर्मांतरण और जिहाद की यह ऑनलाइन मंडियां क्या उन्हें इस प्रभाव में लेने का काम नहीं कर रहीं हैं? यदि सरकार वाकई माहौल सुधारना चाहती है तो उसे इस पर लगाम कसनी ही चाहिए।

जानें, क्या कहता है संविधान
संविधान में धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का जिक्र अनुच्छेद 25-28 में किया गया है। आमतौर पर ऐसे लोग देश के संविधान में धर्म के प्रचार की छूट का हवाला देते हुए अपना बचाव करते हैं। यह ध्यान देने की बात है कि संविधान में सिर्फ धर्म के प्रचार की बात की गई है, लेकिन धर्मांतरण को गलत मानते हुए इसे किसी व्यक्ति के विवेक के अधिकार का हनन करार दिया गया है। संविधान के अनुसार, देश का कोई आधिकारिक राज्य धर्म नहीं है और राज्य द्वारा सभी धर्मों के साथ निष्पक्षता और तटस्थता से व्यवहार किया जाना चाहिए। अनुच्छेद 25 सभी लोगों को विवेक की स्वतंत्रता तथा अपनी पसंद के धर्म के उपदेश, अभ्यास और प्रचार की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

क्या कहता है कानून?
कानून के जानकारों का कहना है कि इस तरह के प्रचार को लेकर किसी तरह का लीगल ऐक्शन लिया जाना मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि भारतीय दंड संहिता में इस बारे में स्पष्टता नहीं है। हां, यदि कोई आपके धार्मिक विश्वास और मान्यता को ठेस पहुंचाता है तो आप केस दर्ज करा सकते हैं। सीधे तौर पर यदि कुछ न कहा गया हो तो ऐसा साबित करना मुश्किल होता है। यही वजह है कि हाल ही में इस्लामिक धर्म उपदेशक जाकिर नाइक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई को लेकर जानकारों की राय बंटी हुई है।

साइबर रैडिकलाइजेशन रोकने को जरूरी है ठोस साइबर लॉ
देश में साइबर लॉ के जानकार कहे जाने वाले पवन दुग्गल कहते हैं, ‘बीते कुछ सालों में इंटरनेट पर हाइपर रैडिकल कॉन्टेंट की बाढ़ आ गई है। लेकिन, इसे रोकने में हमारा आईटी कानून असफल है। इसकी वजह यह है कि आईटी ऐक्ट में इसे लेकर किसी स्पष्ट प्रावधान का अभाव है।’ हां, किसी वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट को आपत्तिजनक पाए जाने पर सरकार उसे ब्लॉक कर सकती है या करवा सकती है।

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