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दुनिया के सबसे अधिक अनुयायियों वाले ईसाई संप्रदाय में देवता के समान पूजे जाने वाले ईसा मसीह महज एक मिथक थे ! शायद ही किसी को यकीन होगा। लेकिन इतिहासवेत्ता माइकल पाॅल्कोविच की मानें तो ईसा मसीह यानी यीशु का जन्म कभी इस दुनिया में हुआ ही नहीं था। पाॅल्कोविच ने अपने दावे के समर्थन में पहली से तीसरी सदी तक के 126 लेखकों का उदाहरण दिया है। ब्रिटिश अखबार डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पाॅल्कोविच ने ईसा मसीह का कभी अस्तित्व होने की बात को साफ तौर पर नकारते हुए कहा है कि उनके चरित्र को ईसाई मत के अनुयायियों ने गढ़ा था। पाॅल्कोविच ने अपने लेख ‘द फेबल आॅफ द क्राइस्ट‘ और ‘नो मीक मसीहा‘ नामक पुस्तक में यह दावे किए हैं। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि ईसा मसीह के एक मिथकीय चरित्र के दुनिया भर में कई अरब अनुयायी हैं। पाॅल्कोविच लिखते हैं,
‘मैंने पहली से तीसरी सदी के 126 लेखकों की रचनाओं का अध्ययन किया। जिनमें से 122 की रचनाओं में ईसा मसीह का कोई जिक्र नहीं मिलता। जबकि पाॅल, मारकियोन, एथेनागोरस और मैथ्यू की रचनाओं में ईसा मसीह के अस्तित्व का खंडन किया गया है। इसके अलावा बाइबल में वर्णित कुमराम, नजारेथ. येरुशलम और बेथलेहम की कहानियां भी परस्पर विरोधाभासी हैं। इसके अलावा भी कई टूटी हुई कडि़यां हैं। इन सभी तथ्यों के आधार पर मैं यह मानता हूं कि ईसा मसीह सिर्फ एक मिथक थे।’
इससे आगे पाॅल्कोविच कहते हैं,
‘शायद तत्कालीन समय में ईसा मसीह कोई सामुदायिक नेता रहे होंगे या फिर यहूदी धर्मगुरू।‘
लेकिन उन्होंने ईसा मसीह के प्रचलित स्वरूप को साफ तौर पर नकार दिया। पाॅल्कोविच के मुताबिक उन्हें सिर्फ 95 ईसवी में लिखित एक पुस्तक ‘द जूइश वाॅर‘ में ईसा का जिक्र मिला। जिसे रोमन इतिहासकार जोसेफस फलैवियस ने लिखा था। हालांकि वह इसे भी यह कहकर खारिज करते हैं कि इस पुस्तक में ईसा का नाम बाद में संपादित प्रतियों जोड़ा गया। जबकि इसकी मूल प्रति में ऐसा कोई जिक्र नहीं है। पाॅल्कोविच के अनुसार बाइबल में भी ईसा मसीह के धार्मिक प्रचार के प्रयासों का ही जिक्र किया गया है, लेकिन उनके व्यक्तित्व और अस्तित्व को लेकर कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। वह कहते हैं,
‘बाइबल में ईसा के मूल स्थान, माता-पिता, जीवन चक्र आदि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। पाॅल्कोविच के मुताबिक ईसा मसीह ने खुद अपने बारे में कुछ भी नहीं लिखा यह आश्चर्यजनक है। एक ऐसा विस्मयकारी चरित्र जिससे दुनिया हक्की-बक्की रह गई, उसने अपने बारे में कुछ नहीं लिखा, इससे साबित होता है कि ईसा एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं थे। पाॅल्कोविच कहते हैं कि ईसा मसीह का चरित्र पूरी तरह काल्पनिक है? इसलिए 127वें लेखक के तौर पर उनका नाम भी जोड़ा जाना चाहिए, जिनके लेखन में ईसा का जिक्र नहीं है।
   The 126 texts Paulkovich studied (shown here) were all written in the period during or soon after the supposed existence of Jesus, when Paulkovich says they would surely have heard of someone as famous as Jesus - but none mention him, leading the writer to conclude he is a 'mythical character' invented later
The 126 texts Paulkovich studied (shown here) were all written in the period during or soon after the supposed existence of Jesus, when Paulkovich says they would surely have heard of someone as famous as Jesus – but none mention him, leading the writer to conclude he is a ‘mythical character’ invented later
पाॅल्कोविच अपने दावे के समर्थन में एक उदाहरण के जरिए बताते हैं,
‘144 ईसवी में क्रिश्चियन फादर मारकियोन ने किसी कुंवारी मां के गर्भ से ईसा के जन्म की बात को खारिज किया था।‘ इतिहासवेत्ता पाॅल्कोविच कहते हैं, ‘यहां तक कि बाइबल के बुक आॅफ मार्क में ईसा मसीह के तीन दिन बाद जीवित होने की बात को बाद में शामिल किया गया था। पहले इसमें ऐसी किसी घटना का जिक्र नहीं था। यही नहीं पाॅल्कोविच ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाए जाने की घटना को भी पूरी तरह मिथ्या बताते हैं। वह कहते हैं, ‘इस प्रकार की घटना का किसी ने उल्लेख नहीं किया है, बल्कि संदिग्ध तौर पर बाइबल में बाद में कुछ अंधविश्वासी लोगों ने इस प्रसंग को जोड़ दिया।‘ गौरतलब है कि पूरे ईसाई जगत में ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाए जाने की घटना को मान्यता प्राप्त है और उसे मानवता के लिए बलिदान करार दिया जाता है।
निश्चित तौर पर पाॅल्कोविच के विचार काफी विवादास्पद हो सकते हैं, क्योंकि उनकी थ्योरी के विपरीत पूर्व के कई स्काॅलर्स ने ईसा मसीह के अस्तित्व को स्वीकार किया है। लेकिन उनकी रिसर्च ने कुछ नए सवाल तो खड़े किए ही हैं, जिस पर तार्किक बहस की ही जानी चाहिए। अधिकतर शोधकर्ताओं का मानना है कि ईसा का जन्म 7 से 4 ईसा पूर्व के बीच हुआ था और 30 से 36 ईसवी के दौरान मौत हुई थी। आम मान्यता है कि ईसा मसीह का बपतिस्मा जाॅन द बेप्टिस्ट ने कराया था और रोमन साम्राज्य के राजा पोंटियस पिलेट ने उनको सूली पर चढ़ाने का आदेश दिया था। इन सभी मान्यताओं के बावजूद इतिहासकार और रिसर्चर पाॅल्कोविच द्वारा की गई तथ्यपरक रिसर्च से एक बार फिर यह सवाल तो खड़ा ही होता है कि वास्तव में ईसा मसीह केवल एक ‘मिथकीय‘ चरित्र थे।

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