विभिन्न राज्यों में करीब 4 लाख एकड़ जमीन वक्फ बोर्डों के पास है। भारतीय रेलवे और रक्षा मंत्रालय की भू-संपत्ति के बाद वक्फ बोर्ड के पास ही सर्वाधिक जमीन है। इसी तरह वक्फ बोर्ड के तहत बनी हुई कब्रगाहों के क्षेत्र निर्धारित हैं। “वक्फ” का इतिहास गरीबों के कल्याण से जुड़ा रहा है। अल्लाह के नाम पर किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा गरीबों के लिए दान की गई संपत्ति “वक्फ” मानी गई है। भारत में लगभग 800 वर्षों से “वक्फ” का प्रावधान रहा है। देश में करीब 3 लाख अचल संपत्तियाँ वक्फ संपत्ति की तरह अब भी पंजीकृत हैं। 

केरल का प्रसिद्ध पद्मनाभ स्वामी मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिर होने का गौरव प्राप्त कर चुका है. मंदिर के तहखानों से अब तक मिले दुर्लभ मूर्तियों, जवाहरातों और सिक्कों आदि की कीमत १ लाख करोड़ रुपये आंकी गयी है.मंदिर में मिले इस अपार खजाने के संरक्षण और इसके सदुपयोग को लेकर भी बहस चल पड़ी है. कोई इस धन को समाज कल्याण में खर्च करने की बात कह रहा है, तो कोई इस धन को संग्रहालय में रखने की बात कर रहा है. यह सही है कि देश कि बहुत बड़ी आबादी आज भी भुखमरी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से त्रस्त है. यदि देश को आगे बढ़ना है, तो गरीब वर्गों का कल्याण भी आवश्यक है. लेकिन क्या केवल मंदिरों के खजाने से देश कि समस्याओं का हल हो जायेगा. वर्तमान समय में देश को मंदिर से प्राप्त खजाने कि अपेक्षा स्विस बैंकों में जमा काले धन की आवश्यकता है.

भारत भर में मंदिर ही नहीं वक्फ बोर्ड के पास भी अथाह संपत्ति है. विभिन्न राज्यों में करीब 4 लाख एकड़ जमीन वक्फ बोर्डों के पास है। भारतीय रेलवे और रक्षा मंत्रालय की भू-संपत्ति के बाद वक्फ बोर्ड के पास ही सर्वाधिक जमीन है। इसी तरह वक्फ बोर्ड के तहत बनी हुई कब्रगाहों के क्षेत्र निर्धारित हैं। “वक्फ” का इतिहास गरीबों के कल्याण से जुड़ा रहा है। अल्लाह के नाम पर किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा गरीबों के लिए दान की गई संपत्ति “वक्फ” मानी गई है। भारत में लगभग 800 वर्षों से “वक्फ” का प्रावधान रहा है। देश में करीब 3 लाख अचल संपत्तियाँ वक्फ संपत्ति की तरह अब भी पंजीकृत हैं। क्या वक्फ बोर्ड की संपत्ति को भी समाज कल्याण के लिए खर्च कर देना चाहिए.

भारत की सत्ता ने सम्प्रदाय विशेष को हमेशा अपनी सत्ता बचाने के लिए कवच की तरह से इस्तेमाल किया है. वोट बैंक की यह राजनीति जहाँ अमरनाथ यात्रियों की सुविधा के लिए सौ एकड़ जमीन नहीं दे सकती है. लेकिन हज यात्रियों को पासपोर्ट की अनिवार्य जांच प्रक्रिया भी नहीं करने का निर्णय किया जाता है. भारत की केंद्र और राज्य सरकारों की वोट बैंक की राजनीति ने देश के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे को चोट पहुँचाने का कार्य किया है. यदि पद्मनाभम स्वामी मंदिर की संपत्ति को समाज कल्याण में खर्च किया जा सकता है, तो वक्फ बोर्ड की संपत्ति को क्यों नहीं.

एक धर्मनिरपेक्ष चरित्र वाले राष्ट्र में विभिन्न धर्मों एवं सम्प्रदायों के बीच यह दोहरा मापदंड वोट बैंक को साधने का कुटिल प्रयास है. वक्फ बोर्ड की संपत्ति रेलवे और रक्षा मंत्रालय के पश्चात् देश में सबसे अधिक है. क्या इस संपत्ति का सामाजिक कल्याण के कार्यों में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. यदि पद्मनाभम स्वामी मंदिर का खजाना समाज कल्याण के कार्य में लग सकता है, तो वक्फ बोर्ड की अथाह संपत्ति का भी समाज कार्यों में उपयोग हो सकता है. इसलिए पद्मनाभम स्वामी मंदिर, तिरुपति बालाजी मंदिर, साईं शिर्डी मंदिर और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों, प्रमुख मंदिरों एवं वक्फ बोर्ड को मिलने वाले चढ़ावे और दान के निश्चित अंश को समाज कल्याण के कार्यों में खर्च किया ही जाना चाहिए.

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