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परम वैभवशाली भारत

भारत देश की गिनती विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में होती है. भारत के नाम के बारे में कहा जाता है की प्राचीनहिन्दू राजा भरत के नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा. सम्राट भरत मनु के वंशज ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र थे.भारत(भा+रत) का अर्थ है आतंरिक प्रकाश, या विदेक रुपी प्रकाश में लीन. भारत की इस पुण्यभूमि को कई अन्य नामों से पुकारा जाता है जैसे- हिंदुस्तान, आर्यावर्त, जम्बूद्वीप आदि. भारतभूमि को “हिंदुस्तान” नाम प्राचीन समय में अरब के लोगों ने दिया था, जिसका अर्थ है “वह स्थान जहाँ हिन्दू जाति निवास करती है”. इसी प्रकार सेभारतभूमि को जम्बूद्वीप और आर्यावर्त जैसी संज्ञाओं से भी नवाजा गया है. भारत के अंग्रेजी नाम “इंडिया” कि उत्पत्ति “इंडस” शब्द से हुई, जो सिन्धु नदी का अंग्रेजी नामकरण है. भारतभूमि विश्व कि प्राचीनतम सभ्यताओं में है, जिसने आज भी अपनी सभ्यता और संस्कृति को संजोकर रखने का कार्य किया है. जिसके लिए कहा जाता है कि-
“यूनान, मिस्त्र, रोमां सब मिट गए जहाँ से,
क्या बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.
आइये एक बार भारत के बारे में संक्षिप्त जानकारी लेते हैं, जिससे इस अतुल्यनीय भारत को समझने में आसानी हो सके. भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा राष्ट्र है. समस्त विश्व में भारत का जनसँख्या के मामले में दूसरा स्थान है. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है. भारत की सबसे बड़ी नदी जीवनदायिनी गंगा है, जिसमें लोग बड़े ही श्रद्धा भाव से डुबकी लगाते हैं.भारतीय  संस्कृति में नदियों का विशिष्ट स्थान रहा है, भारत के सभी प्रमुख शहर नदियों के किनारे ही बसे हैं. सिन्धु , नर्मदा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कावेरी, कृष्णा, चम्बल,सतलज, व्यास आदि नदियाँभारत की प्रमुख नदियाँ हैं. भारत में तीन सौ से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं. भारत में विश्व के लगभग सभी प्रमुख देशों के लोग निवास करते हैं. जिनमें प्रमुख हैं हिन्दू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, यहूदी आदि.
भारत का भौगोलिक परिचय- 
भारत का कुल क्षेत्रफल- ३२,८७,,२६३ वर्ग कि.मी
उत्तर से दक्षिण तक कुल लम्बाई- ३,२१४ कि.मी
पूर्व से पश्चिम तक कुल चौड़ाई- २,९३३ कि.मी
अन्य देशों से लगी सीमायें- १५,२०० कि.मी
देश कि समुद्री सीमा- ७,५१६.६ कि.मी
भारत का भौगोलिक विस्तार ८ डिग्री ४ से ३७ डिग्री ६ उत्तरी अक्षांश और ६८ डिग्री ७ से ९७ डिग्री २५ पूर्वी देशांतर तक है. भारत की उत्तर-पश्चिम से अफगानिस्तान, पाकिस्तान उत्तर पूर्व से चीन, नेपाल और भूटान और पूर्व में बांग्लादेश और म्यांमार स्थित हैं. भारत के उत्तर में हिमालय और दक्षिण में हिंद महासागर है. हिंद महासागर में भारत के दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण पूर्व में इंडोनेशिया है. भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब महासागर है. भारत के बारे में कहा जाता है कि इसकी सीमायें प्रकृति द्वारा निर्मित हैं.
भारत की अर्थव्यवस्था-
भारत ने सन १९४७ में ब्रिटिश शासन से आजाद होने के बाद उल्लेखनीय प्रगति की है. भारत वर्तमान समय में विश्व की चौथी सबसे बड़ी और दूसरी सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है. सन १९९१ में हुए आर्थिक सुधारों के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने बहुत तेजी से अपने कदम बढ़ाये हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था ने वर्त्तमान समय में कृषि पर अपनी निर्भरता कम की है, देश के सकल घरेलू उत्पाद में केवल २५% हिस्सेदारी है. पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारतसॉफ्टवेयर और बीपीओ का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है. अमेरिका, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया भी भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार हैं. भारत के निर्यातों में कृषि उत्पाद, चाय, कपडा, बहुमूल्य रत्न व आभूषण, सॉफ्टवेयर सेवाएं, इंजीनियरिंग, रसायन तथा चमड़ा उत्पाद आदि प्रमुख हैं. भारत कच्चा तेल और मशीनरी का प्रमुख आयातक देश है. पिछले वर्षों में आई मंदी के दौरान भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपने को बचाए रखा जिस वक़्त विश्व की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थायें मंदी के दौर से गुजर रही थीं. यह घटनाक्रम भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति का बखूबी परिचय देता है. संक्षिप्त में कहा जाये तो वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर तेजी से अपने कदम बढ़ा रही है.
भारत की संस्कृति- भारत की संस्कृति विश्व की सबसे समृद्ध संस्कृतियों में से एक है. भारत की संस्कृति ने आज भी अपने कई आयामों को जस का तस संजोकर रखा हुआ है. यही भारत की सांस्कृतिक एकता का कारण भी है.भारतीय संस्कृति एक ऐसी संस्कृति है जिसने विश्व भर से आने वाले लोगों को बखूबी अपने में समेटे रखा है. भारतकी संस्कृति सही मायनों में वैश्विकता को धारण करने वाली संस्कृति है, जिसने ‘वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को आत्मसात किया है. भारतीय संस्कृति एक मिश्रित संस्कृति है जिसमें आक्रमणकारी के रूप में आने वाले लोग भी समां चुके हैं. भारतीय संस्कृति की यही खूबी है की यहाँ पर सभी लोग एक भारतीय के तौर पर एक हैं चाहे वे किसी भी मजहब के लोग हों. भारतीय संस्कृति में कहा भी गया है कि-
उत्तरं यत समुद्रस्य, हिमाद्रेश्चैव दक्षिणं.
वर्ष तद भारतं, नाम भारती यत्र संतति.
अर्थात जिसके उत्तर में हिमालय और दक्षिण में समुद्र है, वह पुण्यभूमि भारत है और यहाँ रहने वाले लोग भारतीय हैं.भारतीय संस्कृति में यह बात पूरो तरह से रची-बसी हुई है. यहाँ पर रहने वाले विभिन्न मजहबों के लोगों में गजब कि राष्ट्रीय एकता है. आधुनिक भारत का समाज, भाषाएँ, रीति-रिवाज आदि इसका प्रमाण हैं. भारतीय समाज बहुभाषी, बहुधार्मिक तथा मिश्रसांस्कृतिक है. यहाँ विभिन्न धर्मों के कई मन-भावन पर्व-त्यौहार धूमधाम से मनाये जाते हैं. दिवाली, दशहरा, होली, पोंगल तथा ओणम आदि भारत में प्रमुख त्यौहार हैं. ईद, मुहर्रम, क्रिसमस, ईस्टर आदि भी काफी लोकप्रिय हैं. भारतीय संस्कृति में लगभग सभी त्यौहार कृषि पर आधारित हैं या पौराणिक मान्यताओं पर.
भारतीय कला और नृत्य के क्षेत्र में भी बहुत वैभवशाली रहा है. भारत में संगीत तथा नृत्य कि अपनी शैलियाँ हैं, जो कि बहुत विकसित और लोकप्रिय हैं. भरतनाट्यम, ओडिशी, कत्थक आदि प्रसिद्ध नाट्य शैलियाँ हैं. हिन्दुस्तानी संगीत तथा कर्णाटक संगीत भारतीय संगीत कि दो प्रमुख धाराएँ हैं. संक्षिप्त में कहा जाये तो भारतीय संस्कृति का इतिहास बहुत ही अनुपम और वैभवशाली रहा है.
भारत के प्राकृतिक संसाधन- कोयला, कच्चा लोहा, मैगनीज, पेट्रोलियम, टाईटेनियम, क्रोमाआईट, प्राकृतिक गैस, मैगनेसाइट, चूना पत्त्थर, जिप्सम, फ्लोराईट आदि भारत के प्रमुख प्राकृतिक संसाधन हैं.
भारत के कृषि उत्पाद-  भारत में चावल, गेहूं, चाय, कपास, गन्ना, आलू, जूट, दालें आदि. भारत के प्रमुख कृषि उत्पाद हैं. जिनके उत्पादन में भारत का अग्रणी स्थान है.
भारत का मौसम-
भारत के अधिकतर उत्तरी और उत्तरपश्चिमीय प्रांत हिमालय की पहाङियों में स्थित हैं। शेष का उत्तरी, मध्य और पूर्वी भारत गंगा के उपजाऊ मैदानों से बना है। उत्तरी-पूर्वी पाकिस्तान से सटा हुआ, भारत के पश्चिम में थार का मरुस्थल है। दक्षिण भारत लगभग संपूर्ण ही दक्खन के पठार से निर्मित है। यह पठार पूर्वी और पश्चिमी घाटों के बीच स्थित है।
कई महत्वपूर्ण और बड़ी नदियाँ जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना, गोदावरी और कृष्णा भारत से होकर बहती हैं। इन नदियों के कारण उत्तर भारत की भूमि कृषि के लिए उपजाऊ है।
भारत के विस्तार के साथ ही इसके मौसम में भी बहुत भिन्नता है। दक्षिण में जहाँ तटीय और गर्म वातावरण रहता है वहीं उत्तर में कड़ी सर्दी, पूर्व में जहाँ अधिक बरसात है वहीं पश्चिम में रेगिस्तान की शुष्कता। भारत में वर्षा मुख्यतया मानसून हवाओं से होती है।
भारत कि इस पुण्यभूमि को प्रकृति ने भली-भांति सजाया संवारा है. भारत ही विश्व में एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमायें प्रकृति द्वारा निर्मित हैं. भारत को देवनिर्मित राष्ट्र भी कहा जाता है. कहा गया है कि-
हिमालयात समारभ्य यावादिन्दुसरोवरम,
तम देव निर्मितं देशं हिन्दुस्थानम प्रचक्षते.
यह देव निर्मित राष्ट्र अनंत काल से विश्व गुरु के रूप में विद्यमान रहा है. वर्तमान समय में सन १९४७ में स्वतंत्र होने के बाद से ही भारत एक राष्ट्र के रूप में नित नए आयामों कि ओर बढ़ रहा है. दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत सबसे बड़ा राष्ट्र है. विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत विकसित राष्ट्र बनने से बस कुछ ही कदम दूरी पर है. विश्व का सबसे युवा राष्ट्र भारत जल्द ही विश्व का एक बार फिर सिरमौर बनेगा. यदि भारत और भारतीय इसी प्रकार अपनी प्रतिभा का परिचय समस्त विश्व को देते रहे. इस कि घोषणा भारत ही नहीं भारत दौरे पर आने वाले कई राष्ट्राध्यक्षों ने कि है कि आने वाला समय भारत और भारत के लोगों का ही है. अर्थात विश्व गुरु भारत अब पुनः अंगड़ाई लेने लगा है, और परम वैभव को पाने कि ओर अग्रसरित है.

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